हिंसा में जान गंवाने वालों के परिजनों को एक करोड़ नगद और परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की मांग
बेबाक दुनिया डेस्क
नई दिल्ली। हरियाणा प्रांत के नूंह में 31 जुलाई को निकाली गई जलाभिषेक यात्रा में हिंसा के बाद रविवार को 52 पालों के चौधरी अरुण जेलदार की अगुवाई में हुई सर्वजातीय हिंदू महापंचायत में 28 अगस्त को दोबारा उसी जगह से फिर जलाभिषेक यात्रा निकालने का फैसला हुआ, जहां से हिंसा की शुरुआत हुई थी।
नूंह की सीमा पर स्थित पौंडरी-नौरंगाबाद गांव में हुई महापंचायत में इस दौरान वक्ताओं ने उत्तेजक भाषण भी दिए। फैसला लिया गया कि नूंह के नलहर से फिर जलाभिषेक यात्रा शुरू की जाएगी, जो फिरोजपुर, झिरका और सिंगार मंदिर होकर गुजरेगी। महापंचायत में गुरुग्राम, पलवल और आसपास के गांवों के लोग भारी संख्या में जुटे।
महापंचायत में केवल 500 लोगों के ही पहुंचने की अनुमति थी, लेकिन करीब डेढ़ हजार से ज्यादा लोग जुटे। इस दौरान जिला प्रशासन की चेतावनी के बावजूद उत्तेजक भाषणबाजी भी हुई। महापंचायत में हिंसा में मारे गए हिंदुओं के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा संग किसी परिजन को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई।
इसके अलावा नूंह जिले को तोड़कर उसमें शामिल उप मंडलों को दूसरे जिलों में शामिल करने की भी मांग की गई। साथ ही हिंसा के मामले में जिन हिंदुओं के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उनको वापस लेने और नूंह में आत्मरक्षा के लिए हथियारों के लाइसेंस देने में उदार रवैया अपनाने की भी मांग की गई।
इसके अलावा हिंदुओं की हत्या में वांक्षित जावेद अहमद की गिरफ्तारी, रोहिंग्यो को मेवात और हरियाणा से ही नहीं, बल्कि देश से बाहर करने और एनआरसी को जल्द लागू करने की मांग की गई। इस मौके पर गोरक्षक दल के आचार्य आजाद शास्त्री समेत आसपास के खापों के लोग भारी संख्या में मौजूद थे।
उधर, महापंचायत शांति से निपटने पर जहां जिला और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली, वहीं, हरियाणा सरकार ने भी राहत महसूस की है। अब सरकार और जिला प्रशासन का पूरा फोकस 28 अगस्त पर होगा।
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