गोटीपुआ नृत्य देखकर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ऑडिटोरियम


बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। आईआईटी रुड़की में स्पिक मैके में ओडिशा के पारंपरिक नृत्य गोटीपुआ को देख दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के बाद विशेष प्रश्नोत्तर सत्र में लोगों को कलाकारों के साथ बातचीत का मौका मिला।
कार्यक्रम का आयोजन मैक ऑडिटोरियम में किया गया। शुरुआत दीप जलाकर किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुरु मगुनी दास के मार्गदर्शन में दसभुजा गोटीपुआ ओडिशा नृत्य परिषद के गोटीपुआ नर्तकों द्वारा किया गया। जीवंत परिधानों में सजे युवा नर्तकों ने राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम के दृश्यों को चित्रित कर कलाबाजियों और मनमोहक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मर्दला पर बटकृष्ण दास, गायन और हारमोनियम पर प्रियब्रत पलाई, वायलिन पर चंदन सेठी, बांसुरी पर दीनदयाल मोहंता और मजीरा पर विद्याधर नायक ने समा बांध दिया। प्रश्नोत्तर सत्र में बातचीत के दौरान गोटीपुआ नृत्य कलाकार गुरु मगुनी दास ने कहा, आईआईटी में प्रदर्शन करना एक अविश्वसनीय अनुभव रहा है।
कहा, गोटीपुआ की प्राचीन कला को ऐसे उत्साही दर्शकों संग साझा करना न केवल हमें परंपरा को संरक्षित करने का मौका देता है, बल्कि युवा पीढ़ी से जुड़ने में भी मदद करता है। उम्मीद है कि हमारे प्रदर्शन से छात्रों को ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की कालातीत सुंदरता के लिए गहरी समझ मिलेगी।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, गोटीपुआ नृत्य प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भारत की विविध कलात्मक परंपराओं को जीवंत कर हमारे परिसर को समृद्ध करते हैं। कहा, युवाओं को हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में ऐसे अनुभव महत्वपूर्ण हैं, और हमें उनकी मेजबानी करने पर गर्व है। इस मौके पर आईआईटी के प्रोफेसर समेत तमाम छात्र और छात्राएं मौजूद थे।
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