January 31, 2026

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देश का नाम इंडिया दैट इज भारत की जगह केवल ‘भारत’ होना चाहिए : नरेश

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उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने मानसून सत्र में संसद में उठाई मांग
बोले, अंग्रेजी गुलामी के प्रतीक को हटा कर संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन कर पुनः भारत रखा जाए

बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून।
संसद के मानसून सत्र में राज्य सभा सदस्य नरेश बंसल ने आजादी के अमृत काल में अंग्रेजी गुलामी के प्रतीक देश का नाम इंडिया दैट इज भारत हटा कर केवल ‘भारत’ करने की मांग की।
राज्यसभा सांसद के निजी सचिव के मुताबिक, सांसद बंसल ने विशेष उल्लेख में कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 15 अगस्त को लाल किले से देश के नाम संबोधन में साफ कहा था कि दासता के प्रतीक चिन्हों से देश को मुक्ति दिलाना जरूरी है। कहा, प्रधानमंत्री ने विगत नौ सालों में कई कदम उठाए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कई मौकों पर औपनिवेशिक विरासत, औपनिवेशिक प्रतीक चिन्हों को हटाने और उसकी जगह परंपरागत भारतीय मूल्यों और सोच को लागू करने की वकालत की है।
बंसल ने कहा, आजादी के अमृत महोत्सव में देश को आज एक नई प्रेरणा और ऊर्जा मिली है। साथ ही गुलामी की पहचान से मुक्ति मिली है। आज देश में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदला जा चुका है।
कहा, देश का बजट जो दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है। आज यदि राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी सुभाष चंद बोस की मूर्ति लगी है तो ये गुलामी की मानसिकता के त्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं।
सांसद बंसल ने संसद में विषेश उल्लेख में कहा, अंग्रेजों ने लगातार ढाई सौ साल तक भारत पर शासन किया और देश का नाम भारत से बदल कर इंडिया कर दिया। भारत की स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और बलिदानों के कारण जब 1947 में देश आजाद हुआ और भारत का संविधान 1950 में लिखा गया तो उसमें भी हम भारतीयों ने लिख दिया ‘इंडिया दैट इज भारत’, जबकि हमारे देश का नाम हजारों सालों से भारत ही रहा है।
कहा, देश का अंग्रेजी नाम इंडिया शब्द गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम एक ही होना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन कर देश का नाम इंडिया दैट इज भारत हटा कर केवल भारत होना चाहिए। देश को मूल और प्रमाण प्रमाणिक नाम भारत से ही मान्यता दी जानी चाहिए।
संसद में सांसद बंसल ने मांग की कि आजादी के अमृत काल में अंग्रेजी गुलामी के प्रतीक को हटा पुण्य पावन धरा का नाम संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन कर पुनः भारत रखा जाए।

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