द्रौपदी मुर्मु ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के परिवीक्षार्थियों को पदक और प्रमाणपत्र प्रदान किए
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। अपने उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के दीक्षांत समारोह में प्रमाणपत्र और पदक प्रदान किए।
राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अफसरों को बधाई देते हुए कहा, बैच में 10 महिला अधिकारी हैं। महिलाएं समाज के प्रगतिशील बदलाव की प्रतीक हैं। अकादमी की पर्यावरण के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वन सेवा के अफसरों पर जंगलों के संरक्षण, संवर्धन एवं पोषण की जिम्मेदारी है। अधिकारी अपने अप्रतिम दायित्व के प्रति सजग और सचेत होंगे एवं पूर्ण निष्ठा से उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेंगे।






कहा, पृथ्वी की जैव-विविधता एवं प्राकृतिक सुंदरता का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे हमें करना है। वन सेवा के पी श्रीनिवास, संजय कुमार सिंह, एस मणिकन्दन जैसे अफसरों ने ड्यूटी के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्राण न्योछावर किए हैं। देश को वन सेवा ने बहुत अफसर दिए हैं, जिन्होंने पर्यावरण के लिए अतुलनीय कार्य किए हैं।
कहा, इनको आप अपना रोल मॉडल बनाएं एवं उनके दिखाए आदर्शों पर आगे बढ़ें। कहा, हमारी प्राथमिकताएं मानव केंद्रित होने के साथ प्रकृति केंद्रित भी होनी चाहिए। विश्व के कई भागों में वन संसाधनों की क्षति तेजी से हुई है। कहा, विकास-रथ के दो पहिये होते हैं, परंपरा और आधुनिकता। आज मानव समाज पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं का दंश झेल रहा है। इसके कारणों में विशेष प्रकार की आधुनिकता है, जिसके मूल में प्रकृति का शोषण है।
कहा, जनजातीय समाज ने प्रकृति के नियमों को जीवन का आधार बनाया है। जनजातीय जीवन शैली मुख्यतः प्रकृति पर आधारित होती है। इस समाज के लोग प्रकृति का संरक्षण करते हैं। यह अत्यंत जरूरी है कि सदियों से जनजातीय समाज द्वारा संचित ज्ञान के महत्व को समझा जाए और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए उपयोग किया जाए।





कहा, वन सेवा के अफसरों को भारत के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन ही नहीं करना, बल्कि परंपरा से संचित ज्ञान का मानवता के हित में उपयोग करना है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा, भारतीय वन्य जीवन और वन्यजीव अध्ययन में उत्कृष्टता के लिए एक प्रमुख संस्था के रूप में अकादमी ने अपने क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कहा, संस्था ने वन्य जीव के प्रबंधन, और संरक्षण क्षेत्र में उत्कृष्टता के मानकों को स्थापित किया और नए अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। कहा, उत्तराखंड हिमालय की गोद में बसा है, जो प्राकृतिक सौंदर्य की अतुलनीय धरोहर प्रदान करता है। उत्तराखंड अपनी समृद्ध और विविध वन संपदा के लिए जाना जाता है। हमारे राज्य की प्रमुख संपत्ति इसके वन हैं, जो बहुत समृद्ध जैव विविधता का घर हैं।
कहा, वास्तव में वन संरक्षण के मामले में हमारा राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को ज्ञान, कौशल और मूल्यों से परिपूर्ण किया गया होगा, जिसके बल पर वे हर परिस्थिति में हर कसौटी पर खरे उतरेंगे। इस मौके पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, महानिदेशक वन जितेंद्र कुमार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा आदि भी मौजूद थे।
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