10 मई को दोपहर 12:25 बजे गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। उत्तरकाशी जिले में मां गंगा के शीतकालीन पड़ाव मायके मुखबा (मुखीमठ) से गंगा की डोली बृहस्पतिवार नौ मई को जयकारों के साथ गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गई है। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण व श्रद्धालु मुखबा के गंगा मंदिर में मौजूद रहे। 10 मई को सुबह डोली यात्रा गंगोत्री धाम पहुंचेगी।



इसके बाद शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:25 बजे गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। गौरतलब हो कि, प्रतिवर्ष गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने पर मां गंगा की डोली शीतकालीन पड़ाव मुखबा स्थित गंगा मंदिर में विराजमान हो जाती है। इसके बाद गंगोत्री धाम के कपाट खुलने पर शीतकालीन पड़ाव से मां गंगा की डोली को ग्रामीण धाम के लिए विदा करते हैं।
शुक्रवार 10 मई को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। इससे पूर्व बृहस्पतिवार नौ मई को शीतकालीन पड़ाव मुखबा से ग्रामीणों ने मां गंगा की डोली को धाम के लिए विदा किया। मायके से बेटी की तर्ज पर हुई इस विदाई का दृश्य भावुक करने वाला रहा। ग्रामीणों ने डोली को अरसे व रोटाना आदि का कलेऊ भेंट किया।
हर्षिल में तैनात सेना की जेकएलआई के पाइप बैंड की धुन और गंगा के जयकारों के साथ मां गंगा की उत्सव डोली यात्रा की विदाई पर हर्षिल घाटी के मुखबा सहित सुक्की, झाला, हर्षिल, जसपुर, पुराली, बगोरी व धराली गांव के ग्रामीण व श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे। गंगा पुरोहित सभा के अध्यक्ष संजीव सेमवाल ने बताया कि गंगा की उत्सव डोली में मां गंगा की भोगमूर्ति, मां अन्नपूर्णा, राजा भगीरथी, मां सरस्वती की मूर्ति भी मौजूद रहती है।
बताया, इसके साथ ही समेश्वर देवता की डोली देवी मंदिर तक भी साथ जाती है। नौ मई को डोली यात्रा भैरोंघाटी के देवी मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी, जो अगले दिन (10 मई) सुबह गंगोत्री धाम पहुंचेगी। जहां दोपहर 12:25 बजे विधि विधान से अमृत बेला व अभिजीत मुहूर्त में गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
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