कपाट बंदी के दौरान ढाई हजार तीर्थयात्री थे मौजूद, बाबा केदार के जयकारों से धाम गुंजायमान
बर्फ की चादर ओढ़े है संपूर्ण केदारनाथ धाम, कपाट बंद होने पर मंदिर को फूलों से सजाया गया
असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइंया सरमा और परिजन कपाट बंद होने पर रहे मौजूद
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार (15 नवंबर) को भइया दूज के पवन पर्व पर सुबह 8.30 बजे शुभ लग्न पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंदी के मौके पर करीब ढाई हजार श्रद्धालु भी धाम में मौजूद थे।
केदारनाथ क्षेत्र बर्फ की चादर ओढ़े है और आधा फीट तक बर्फ मौजूद है। बुधवार को कपाट बंद होने के समय मौसम साफ रहा। कपाट बंद होने पर मंदिर को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया था। इस दौरान सेना के बैंड के भक्तिमय धुनों के साथ जय श्रीकेदार और ॐ नमः शिवाय के उदघोष से केदारनाथ धाम गूंज उठा। कपाट बंद होने के बाद भगवान केदार की पंचमुखी डोली हजारों तीर्थयात्रियों और सेना के बैंडबाजों संग पैदल प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए प्रस्थान हुई।
श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय मंगलवार को ही कपाट बंद होने की तैयारियों के लिए केदारनाथ धाम पहुंच गए थे। बुधवार को उनके साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा की धर्मपत्नी रिनिकी भुइयां और उनके परिजन भी कपाट बंद होने के अवसर पर मौजूद रहे। कपाट बंद होने पर बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में केदारनाथ यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हो रहा है।
कहा, यात्रा वर्ष में साढ़े 19 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए। उन्होंने यात्रा से जुड़े सभी संस्थानों को भी बधाई दी। बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया, केदारनाथ धाम में कपाट खुलने की तिथि से 14 नवंबर रात्रि तक 19,57,850 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए। बुधवार को ब्रह्ममुहुर्त में केदारनाथ मंदिर के कपाट खुल गए।
मंदिर में नित्य नियम पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत स्वयंभू शिवलिंग से श्रृंगार अलग कर केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग की उपस्थिति में पुजारी शिवलिंग ने स्थानीय शुष्क पुष्पों, ब्रह्म कमल, कुमजा, राख से समाधि रूप दिया गया। इस दौरान बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय पूरे समय मौजूद रहे। साथ ही पुलिस प्रशासन के अधिकारी, मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, तीर्थपुरोहित समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे।
उधर, बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया, कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली पहले पड़ाव रामपुर बुधवार को पहुंचेगी। 16 नवंबर को पंचमुखी डोली गुप्तकाशी पहुंचेगी और 17 नवंबर को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति शीतकालीन पूजा स्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। इसके बाद शीतकालीन पूजास्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में श्री केदारनाथ भगवान की शीतकालीन पूजा शुरू हो जाएगी।
ये रहे मौजूद
मंदिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, बीकेटीसी के मुख्यकार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, तहसीलदार दीवान सिंह राणा कार्याधिकारी आरसी तिवारी, केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, थानाध्यक्ष मंजुल रावत, प्रदीप सेमवाल, अरविंद शुक्ला, देवानंद गैरोला, उम्मेद नेगी, कुलदीप धर्म्वाण, ललित त्रिवेदी।
समाधि पूजा समापन के बाद सभामंडप के छोटे मंदिर भी बंद किए गए
बुधवार को सुबह साढ़े छह बजे मंदिर गर्भ गृह में समाधि पूजा समापन के बाद मंदिर के अंदर सभामंडप में स्थित छोटे मंदिरों को भी बंद किया गया। इसके बाद ठीक साढ़े आठ बजे केदारनाथ मंदिर के दक्षिण द्वार को बंद किया गया, फिर पूरब के द्वार को भी बंद किया गया। सेना, आईटीबीपी और दानदाताओं ने तीर्थयात्रियों के लिए भंडारे आयोजित किए।




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