February 2, 2026

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चिकित्सा क्षेत्र केवल प्रोफेशन नहीं, एक मिशन भी है : मुर्मु

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं

कहा, वैश्विक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से एम्स, ऋषिकेश की विशेष पहचान

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। चिकित्सा क्षेत्र एक प्रोफेशन ही नहीं, बल्कि एक मिशन भी है। संपन्न और सक्षम व्यक्ति के पास उपचार कराने के कई माध्यम हैं, ऐसे में चिकित्सकों को हर गरीब और अक्षम व्यक्ति के इलाज को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उपरोक्त बात मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कही। राष्ट्रपति ने देशभर में बढ़ रहे डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों एवं धूप की कमी से महिलाओं में बढ़ रही एनीमिया की बीमारी के उपचार और इस दिशा में एम्स संस्थानों से अनुसंधान का आह्वान किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रसन्नता जाहिर की कि समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत अधिक है, जो एक सामाजिक बदलाव का संकेत है। कहा, देशभर में बेहतर इलाज करने से ही एम्स की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने देश में मधुमेह के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए चिकित्सकों से मरीजों को निजात दिलाने के लिए अनुसंधान बढ़ाने पर जोर दिया।

एम्स ऋषिकेश की चिकित्सकीय सेवाओं की सराहना करते हुए कहा, वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संस्थान द्वारा मुहैया कराई जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से एम्स, ऋषिकेश की विशेष पहचान है। मुर्मु ने एमबीबीएस, डीएम, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग व बीएससी एलाइड हेल्थ साइंस के 10 मेडिकल स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल से नवाजा और उपाधियां प्रदान की।

इस मौके पर राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा, यह समारोह स्नातक चिकित्सकों, नर्सों की उपलब्धियों का उत्सव है। उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र- छात्राओं को बधाई देते हुए कहा, एम्स ऋषिकेश पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने ड्रोन सेवा से चार धाम यात्रा मार्गों पर आपात दवाओं को पहुंचाने के एम्स, ऋषिकेश की योजना को यात्रियों के लिए जीवन रेखा बताया।

कहा, पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्यवासियों को दिल्ली व चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था, लेकिन ऋषिकेश में एम्स की स्थापना से राज्य को विशेष लाभ मिल रहा है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने एम्स ऋषिकेश को प्रदेश के लोगों के लिए आशा की किरण बताया, जो दुर्गम पहाड़ी राज्य के गंभीरतम मरीजों को सेवाएं प्रदान करता है।

कहा, एम्स जैसे संस्थानों में किए गए अत्याधुनिक शोध उभरती बीमारियों और स्वास्थ्य देखभाल चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण हैं। बताया, दूरदराज के क्षेत्रों में तपेदिक रोधी दवाओं को पहुंचने के लिए सफल ड्रोन परीक्षण एम्स, ऋषिकेश द्वारा अपनाए गए नवीन दृष्टिकोण को उजागर करते हैं।

एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. समीरन नंदी ने संस्थान की टेलिमेडिसिन सर्विसेस को चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर बताते हुए कहा, संस्थान एविडेंस बेस्ड मेडिसिन पर प्राथमिकता से कार्य कर रहा है। एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा, संस्थान का मुख्य उद्देश्य रोगी की देखभाल करना है।

आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए कहा, बहुत ही कम समय में एम्स ने 1,28,070 से अधिक रोगियों का योजना के तहत उपचार किया है। राज्य में इस योजना के तहत रोगियों को लाभ देने में हम पहले स्थान में हैं। कहा, बुनियादी ढांचे व स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में एम्स ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।

बताया, वर्तमान में संस्थान में 12 नए आपातकालीन बेड्स सहित 972 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें 200 आईसीयू बेड शामिल हैं। प्रो. मीनू सिंह ने नीकू और पीकू का भी जिक्र करते हुए कहा, शिशु मृत्युदर को कम करने और नवजात शिशुओं की पर्याप्त देखभाल हेतु इन दोनों विभागों की सेवाओं का लोगों को लाभ मिल रहा है।

कैंसर के इलाज को अस्पताल द्वारा दी जा रही सेवाओं के बारे में कहा, एम्स में प्रदेश के अलावा यूपी, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार आदि राज्यों के मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। कहा, संस्थान द्वारा सुदृढ़ टेलिमेडिसिन विभाग के माध्यम से दूरदराज के लोगों को घर बैठे स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रो. मीनू सिंह ने ड्रोन स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान कार्य, शैक्षणिक उपलब्धियों और सोशल आउटरीच सेल से उपलब्ध कराए जा रहे स्वास्थ्य लाभ की खूबियां भी बताई। दीक्षांत समारोह में यूजी, पीजी, सुपर स्पेशियलिटी और एलाइड साइंस के 598 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनु मल्होत्रा व डॉ. जयंती पंत ने किया।

ये रहे मौजूद

डीन एकेडमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल, उपनिदेशक प्रशासन ले. कर्नल अमित पराशर, प्रो. प्रशांत पाटिल, वित्तीय सलाहकार ले. कर्नल एस सिद्धार्थ, प्रो. लतिका मोहन, डॉ. मीनाक्षी धर समेत कई विभागों के विभागाध्यक्ष, फेकल्टी सदस्य, मेडिकल व नर्सिंग छात्र-छात्राएं।

598 छात्र-छात्राओं को प्रदान की गईं उपाधियां

समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एमबीबीएस 2013 बैच से एक, 2015 बैच से एक और 2017 बैच के 98, बीएसएसी नर्सिंग 2017 बैच के 57, बीएससी नर्सिंग 2018 बैच के 97 और बीएससी नर्सिंग 2019 बैच के 100, एमएससी नर्सिंग के 2021 बैच के नौ, एमडी/एमएस 2020 बैच के चार, 2021 बैच के 111, डीएम/एमसीएच में 2021 बैच के 31, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ वर्ष 2022 बैच के 10 और बीएससी एलाईड हेल्थ साईंस 2019-20 बैच के 67 स्टूडेंट्स सहित पीएचडी करने वाले वर्ष 2017-19 बैच के 12 छात्र-छात्राओं को भी उपाधि प्रदान की गईं।

मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं

गोल्ड मेडल-डॉ. दीपिका मेहता, डॉ. कार्तिक के, डॉ. फलक ढाका, डॉ. अंजलि यादव, डॉ. अक्षत ककानी, कुमारी मंजीत, ललिता शर्मा, नंदनी भाटिया, सनमीत कौर और विप्रा।

सिल्वर मेडल-डॉ. फलक ढाका।

कांस्य पदक-डॉ. अंजलि यादव।

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