February 2, 2026

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सात माह के बच्चे के पेट में मानव भ्रूण, डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर हटाया

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हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बच्चे को दिया नया जीवन

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। दून एयर पोर्ट के पास स्थित हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. संतोष सिंह और उनकी टीम ने एक सात महीने के बच्चे के पेट में पल रहे मानव भ्रूण को ऑपरेशन कर हटा दिया।

सात माह के बच्चे के पेट का आकार बढ़ता देख पहले तो उसकी मां ने इसको नजरंदाज किया, लेकिन जब मां का ध्यान बच्चे के असामान्य रूप से लगातार बढ़ रहे पेट की ओर गया तो डॉक्टरों की चौखट नापनी शुरू की। कई जगह चिकित्सकों को दिखाने के बावजूद जब बच्चे को आराम नहीं मिला, तो मां-बाप हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट पहुंचे और अस्पताल के वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. संतोष सिंह को बच्चे को दिखाया।

डॉ. संतोष सिंह के मुताबिक, आरंभिक जांच पेट में किसी असामान्य गांठ होने का शक हुआ, लेकिन जब एक्सरे किया गया तो बच्चे के पेट में पल रहे मानव भ्रूण का पता चला। डॉक्टर के मुताबिक, इसे मेडिकल की भाषा में फीट्स-इन-फीटू (भ्रूण के अंदर भ्रूण) कहते हैं। बताया, बच्चे के माता-पिता को इसकी जानकारी देने के बाद ऑपरेशन की अस्पताल की टीम ने विस्तृत योजना बनाई।

डॉ. सिंह के मुताबिक, पिछले सप्ताह बच्चे के पेट का सफल ऑपरेशन कर अर्द्धविकसित मानव भ्रूण को निकाल दिया गया। ऑपरेशन के चार दिन बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ बच्चे को घर भेज दिया गया। ऑपरेशन और सहयोग करने वाली टीम में टीम लीडर डॉ. संतोष सिंह के अलावा डॉ. आयशा, डॉ. हरीश, डॉ. वैष्णवी, गीता और रजनी थे।

ये होता है फीट्स-इन-फीटू

अस्पताल के बाल शल्य चिकित्सक डॉ. संतोष सिंह के मुताबिक, फीट्स-इन-फीटू मानव भ्रूण-विकास की अत्यंत असामान्य घटना है। इसमें भ्रूण विकास के समय किसी अज्ञात वजह से एक भ्रूण दूसरे के अंदर विकसित होने लगता है, बिल्कुल एक परजीवी की भांति। अल्ट्रासाउंड से इसका पता मां के गर्भ में ही लगाया जा सकता है। हालांकि, अधिकतर मामलों मे इसका पता जन्म के बाद चलता है।

पांच लाख गर्भवतियों में से एक में होने की संभावना

डॉक्टर के मुताबिक, ऐसे मामले लगभग पांच लाख से भी अधिक गर्भवतियों में से किसी एक में हो सकता है। आमतौर पर एक से दो वर्ष तक की आयु के बच्चे के पेट के असामान्य तरीके से बढ़ने से ही मामले संज्ञान में आ जाते हैं। हालांकि, साधारणतया शिशु को जान का खतरा नहीं होता है, लेकिन अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसका एकमात्र इलाज ऑपरेशन ही है।

30 साल के करियर में दूसरा केस

जैलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल के वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ संतोष कुमार ने बताया, अपने 30 साल के डॉक्टरी के पेशे में अब तक का यह दूसरा केस देखा है। पहला केस कहीं और देखा था। ऐसा किन कारणों से होता है, इसके बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी मुहैया नहीं है। बताया, ऑपरेशन एक से डेढ घंटे तक चला है। अब शिशु स्वस्थ है।

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