बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। उत्तरकाशी जिले के वरुणावत पर्वत पर हो रहे भूस्खलन का दूसरे दिन शनिवार को टीएचडीसी, जीएसआई और यूएलएमएमसी के विशेषज्ञों ने शीर्ष पर हुए ट्रीटमेंट और वर्तमान में सक्रिय भूस्खलन जोन के मुख्य केंद्र पर जाकर निरीक्षण किया।












इस दौरान टीम ने भौगोलिक परिस्थिति के साथ मिट्टी के नमूने लिए। इसके साथ ही पहाड़ में वाटर रिचार्ज को लेकर भी निरीक्षण किया। साथ ही विशेषज्ञों की टीम ने वरुणावत शीर्ष पर वर्ष 2003 के भूस्खलन के बाद हुए ट्रीटमेंट में लगे सीमेंट सहित उनके बीच में उगी चीड़ की घास का भी बारीकी से निरीक्षण किया। वहीं, पहाड़ में होने वाली पानी की निकासी का भी सर्वें किया।
इसके बाद टीम ने उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट से मुलाक़ात की। विशेषज्ञों ने कहा, उन्होंने बारीकी से सभी क्षेत्रों का निरीक्षण किया है। सबसे पहले जहां मलबा गिर रहा, वहां सुरक्षा के और पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। कहा, जल्द सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन-प्रशासन को भेजी जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने कहा, विशेषज्ञों की टीम ने वरुणावत का दो दिन का सर्वें पूरा कर लिया है। जल्द ही टीम रिपोर्ट तैयार कर ट्रीटमेंट के सुझावों के साथ सौंपेगी।
इसके पूर्व शुक्रवार को टीम के सदस्यों ने वरुणावत पर्वत के ठीक सामने स्थित कुटेटी देवी क्षेत्र एवं पर्वत की तलहटी में पहुंचकर भूस्खलन वाले क्षेत्र का जायजा लिया था। टीम भूस्खलन के कारण और निवारण पर अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार और उत्तरकाशी जिला प्रशासन को देगी। 27 अगस्त से वरुणावत पर्वत से लगे गोफियारा और जल संस्थान कॉलोनी के ऊपर पहाड़ी से भूस्खलन सक्रिय हुआ है, जिससे बारिश में रुक-रुककर बोल्डर गिर रहे हैं।
जिला प्रशासन के अनुरोध पर शासन ने टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) को इसका सर्वेक्षण करने का जिम्मा सौंपा है। शुक्रवार को टीएचडीसी के साथ जीएसआई (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण) और यूएलएमएमसी (उत्तराखंड भूस्खलन शमन एवं प्रबंधन केंद्र) के विशेषज्ञ उत्तरकाशी पहुंचे, जिन्होंने दूरबीन की मदद से कुटेटी देवी क्षेत्र से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया था।
सर्वेक्षण टीम में उत्तराखंड भूस्खलन शमन एवं प्रबंधन केंद्र की वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक रुचिका टंडन, डिजायन इंजीनियर पंकज उनियाल, जीएसआई की वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक नेहा कुमारी, टीएचडीसी के वरिष्ठ प्रबंधक जेआर कोठारी, स्ट्रक्चरल इंजीनियर टीएचडीसी विनय पुरोहित, जिला टास्क फोर्स के भू-वैज्ञानिक प्रदीप कुमार, अधिशासी अभियंता लोनिवि रजनीश सैनी आदि मौजूद रहे।
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