पौड़ी के श्रीनगर में अलकनंदा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर, हरिद्वार में खतरे के निशान से कुछ दूर






बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से गंगा, अलकनंदा और उसकी सहायक नदियां कहर ढा रही हैं। कहीं खतरे के निशान से ये नदियां ऊपर बह रहीं तो कही, महज कुछ कदम की दूरी पर।
उधर, बारिश के चलते मलबा और भारी मात्रा में पहाड़ों से बोल्डर आने से कई हाईवे और संपर्क मार्ग भी बंद हो गए हैं। दो जिलों पौड़ी और टिहरी में आने वाले देवप्रयाग तहसील क्षेत्र के देवप्रयाग में शुक्रवार को गंगा नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बह रही है। सुबह से अलकनंदा के जल स्तर में पांच मीटर की बढ़ोतरी हुई। यहां श्राद्ध भवन, फुलाड़ी घाट और टोडेश्वर घाट नदी में डूब गए हैं।
उधर, पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में भी अलकनंदा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर है। घाट डूब गए और अलकनंदा नदी पूरे वेग से बह रही है, जबकि धर्मनगरी हरिद्वार में चौथी बार गंगा नदी चेतावनी रेखा के पार पहुंच गई और खतरे के निशान से महज 0.40 मीटर दूर बह रही है। यहां जिला प्रशासन की ओर से गंगा के किनारों पर बसे गांव के लोगों को अलर्ट कर दिया गया है।
उधर, बृहस्पतिवार को रात साढ़े 12 बजे भारी बारिश के चलते उत्तरकाशी जिले के एनएच 534 में मलबा आने से यातायात बंद हो गया। आमसौड़ में पहाड़ी दरकने से सड़क में मलबा जमा होने पर संभावित खतरे को देखकर ग्रामीण दूसरी जगह रहने के लिए चले गए हैं। उधर, यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग फूलचट्टी से आगे बनास के पास भू-धंसाव होने से बड़े वाहनों के लिए बाधित है, छोटे वाहन निकल रहे हैं।
चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कर्णप्रयाग से लेकर बदरीनाथ तक जगह-जगह पर मलबा आने से अवरुद्ध पड़ा है। बृहस्पतिवार को रात में हुई भारी बारिश से सोनल, कंचन नाला, हनुमान चट्टी, गुलाब कोटि और पागल नाला में मलबा आने से मार्ग अवरुद्ध है। इन जगहों पर जगह-जगह तीर्थयात्रियों के वाहन फंसे हैं स्थानीय लोगों की आवाजाही बंद है। बीआरओ और एनएचआईडीसीएल की जेसीबी हाईवे को खोलने में जुटी है।
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