हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विवि में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम में बोले उपराष्ट्रपति
कहा, छात्र-छात्राएं नई दिल्ली आकर नए लोकसभा भवन को देखें, जिससे उन्हें बदलते भारत का आभास हो सके
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। औपनिवेशिक साम्राज्य हमारी नई शिक्षा नीति को बिल्कुल ही पचा नहीं पा रहा है। उनके पाचन क्रिया को ठीक करना होगा और स्वयं मूल्यांकन करते हुए सनातन अस्तित्व को भी पहचानना होगा।
उपरोक्त उद्गार शनिवार को हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कही। कहा, स्वामी दयानंद सरस्वती वैदिक ज्ञान-विज्ञान और आर्य परंपरा के प्रचार प्रसार एवं सांस्कृतिक सामाजिक परिवर्तन के लिए कई आंदोलन के सूत्रधार और प्रवर्तक रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने गुरुकुल कांगड़ी विवि के छात्र-छात्राओं को नई दिल्ली में नए लोकसभा भवन को देखने के लिए आमंत्रित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सोमदेव शतांशु से कहा, छात्र-छात्राओं को नई लोकसभा का भ्रमण कराएं, जिससे उन्हें विकसित भारत, बदलते भारत और नए भारत की परिकल्पना से परिचित और रूबरू होने का अवसर मिल सके।




उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, विद्या एवं संस्कारों की तपस्थली में वेद-विज्ञान, संस्कृति महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में मुझे आमंत्रित कर जो सम्मान आपने प्रदान किया है, उसके लिए मैं हार्दिक आभार आप सभी का प्रकट करता हूं। कहा, विश्वविद्यालय के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद महाराज को श्रद्धा सहित स्मरण एवं प्रणाम करता हूं। कहा, महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर उनके शिक्षा दर्शन को आत्मसात करने वाली संस्था में स्वयं को पाकर बहुत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।





अपने करीब 22 मिनट के भाषण में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ज्ञान विज्ञान और संस्कृति पर आधारित चिंतन पर चर्चा करते हुए महाकुंभ की सराहना की। इस दौरान इशारों इशारों में हाल की कुछ घटनाओं पर अपरोक्ष कटाक्ष भी किए। कार्यक्रम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने भी संबोधित किया।
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