दूसरे दिन सुबह खानपुर के निर्दलीय विधायक ट्रैक्टर से सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे
सुरक्षा कर्मियों ने विस के मुख्य गेट पर रोका, ट्रैक्टर से उतरने के बाद ही अंदर मिला प्रवेश
प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के कई मुद्दे उठाए, सरकार ने दिए जवाब
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। बुधवार को दूसरे दिन उत्तराखंड विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधान मंडल भवन के सामने कांग्रेसी विधायक सीढ़ियों पर धरने पर बैठे। वहीं, खानपुर विस से विधायक उमेश शर्मा ट्रैक्टर चलाकर सत्र में शामिल होने पहुंचे, पर अंदर प्रवेश नहीं मिला।


उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा में प्रवेश के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मांगों के समर्थन में जमकर नारे लगाए। इस दौरान धामी मुस्कुराते हुए विस के अंदर प्रवेश कर गए। वहीं, विस सत्र शुरू होते ही प्रश्नकाल में उप प्रतिपक्ष नेता भुवन कापड़ी ने डेंगू का मामला उठाते हुए पूछा, सरकार ने कितने धन की व्यवस्था डेंगू से लड़ने के लिए की और अब तक कितना खर्च हुआ है।


कापड़ी के प्रश्न का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने बताया, अभी तक प्रदेश में डेंगू से पांच लोगों की मौत हुई है, जिसमें से तीन मरीज कैंसर से पीड़ित थे। बताया, एक सितंबर तक प्रदेश में 746 डेंगू पॉजिटिव पाए गए थे, जिनमें से 660 डेंगू मरीज उपचार के बाद स्वस्थ भी हो गए हैं। बताया, डेंगू से बचाव और उपचार पर स्वास्थ्य विभाग काम कर रहा है। कहा, पैसों की कोई कमी नहीं है।
कहा, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा चढ़ाने की व्यवस्था है। अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में डेंगू के मामले कम हैं। बताया कि, प्रदेश में 900 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। प्रश्न काल में
भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने राजपुर में बने आईस स्केटिंग रिंग का मामला उठाते हुए पूछा, इसकी लागत कितनी आई और क्या उपयोग होगा।
प्रश्न का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा, 2010 में 56.62 करोड़ की लागत से आईस स्केटिंग रिंग को बनाया गया था। बताया, अभी तक यहां पर चार पप्रतियोगिताओं का आयोजन हो चुका है। बताया, फिलहाल अभी इसका मामला कोर्ट में चल रहा है।
विशेषाधिकार का मामला बेहड़ ने उठाया
सदन में विधायक तिलक राज बेहड़ ने विशेषाधिकार हनन का प्रश्न उठाया, इस पर पीठ ने हर हाल में विधायकों के प्रोटोकाल का ध्यान रखने के निर्देश दिए। साथ ही इस बाबत मुख्य सचिव को सभी डीएम और प्रशानिक अफसरों को निर्देश जारी करने के लिए कहा। कहा, विधायकों का फोन उठाने पर अफसरों को माननीय शब्द का उद्बोधन करना होगा।
नानकमत्ता के विधायक गोपाल सिंह राणा ने आपदा के नुकसान का प्रश्न उठाते हुए दीर्घकालिक व्यवस्था की बात कही। कहा, बाढ़ आने पर हम लोग बचाव की बात करते हैं, लेकिन जिन किसानों की जमीन चली गई, क्या वो वापस आ जाएगी। प्रतापनगर के विधायक विक्रम नेगी ने कहा, जंगल, चट्टानों, घाटी-चोटी, ग्लेशियर का प्रदेश है। यहां हर साल बारिश की वजह से बड़े स्तर पर भूमि का कटाव होता है।
लिहाजा दैवी आपदा के नियमों में बदलाव होना चाहिए। कहा, चंबा-धरांसु, उत्तरकाशी में सड़क बनने से लोगों के घर ढह गए, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं। यहां चार गांव ऐसे हैं जो खिसक गए हैं।
दून में बर्न यूनिट में डॉक्टर नहीं। एम्स ऋषिकेश में भी बर्न यूनिट खोली जाए।
भगवानपुर की विधायक ममता राकेश ने कहा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी और डीएम बरसात से पहले जिले के विधायकों के साथ बैठेक करें और हमसे। प्रस्ताव लें, ताकि आपदा में बचाव हो सके, पर अधिकारी सुनते नहीं। आपदा में खंबे टूट गए, लेकिन आज तक ठीक नहीं। 12 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बारिश में छुट्टी करनी पड़ती है।
कलियर विधायक फुरकान अहमद ने कहा, जुलाई में काफी बारिश हुई, जिससे किसानों का भारी नुकसान हुआ है, पानी से हुए नुकसान पर कोई मुआवजा नहीं दिया गया। नदी गांव की तरफ बढ़ रही है। सड़कें टूट चुकी हैं। आज तक बिजली के खंभे नहीं ठीक हुए। जिन किसानों की जमीन नदी में समा चुकी, उन्हें मुआवजा दिया जाए
आदेश गुप्ता ने कहा, मुआवजे के मानक बढ़ाने के साथ ही आपदा पीड़ितों को राहत की मांग। विधायक वीरेंद्र कुमार ने कहा, हम इलाज तब करते हैं, जब बीमारी आ जाती है। जनपद हरिद्वार या प्रदेश में जितने भी नाले-नदियां हैं, उनकी सफाई की व्यवस्था यहां नहीं है।
सुमित हृदयेश ने कहा, हर जिले में प्रभारी मंत्री बनाए गए हैं, लेकिन कोई भी बैठक आपदा से पूर्व नहीं ली जाती। इस बार बरसात में 60 फीसदी लोगों के घरों में पानी भरा । पूरे तराई क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ।
अनुपमा रावत ने कहा, तटबंधों के लिए आपदा का इंतजार किया जाता है। हरिद्वार के कांगड़ी गांव बहने की कगार पर है।
भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार की खोली कलई
भाजपा विधायक रवि बहादुर ने आरोप लगाया कि 20 दिन तक ट्रांसफार्मर नहीं रखे गए। आपदा में किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है। खेत बह गए और किसानों की मदद को कोई तैयार नहीं। उन्होंने सरकार से आपदा में मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की। कहा, आपदा प्रभावित क्षेत्र का दोबारा निरीक्षण कराया जाय। यूपी की तर्ज पर किसानों की एक साल की बिजली और ऋण माफ हो। उन्होंने पूरे हरिद्वार जिले के साथ ही प्रदेश को आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग की।
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