January 16, 2026

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संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन के लिए गुरुकुल आगे आएं : राजनाथ

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रक्षा मंत्री ने संस्कृत पढ़ने, लिखने और बोलने वालों की कम होती संख्या पर जताई चिंता

योग गुरु रामदेव के पतंजलि में स्थापित गुरुकुलम के शिलान्यास कार्यक्रम को कर रहे थे संबोधित

बेबाक दुनिया ब्यूरो

हरिद्वार। संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है और दुनिया के कई विद्वानों ने प्रकृति और सृष्टि को समझने के लिए संस्कृत का ही अध्ययन किया। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए देश के गुरुकुल को आगे आना होगा।

उपरोक्त बात शनिवार को योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में स्थापित गुरुकुलम के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। कहा, संस्कृत का अहम स्थान है। योग दर्शन भी महर्षि पतंजलि ने संस्कृत में ही लिखा था।राजनाथ ने संस्कृत पढ़ने, लिखने और बोलने वालों की कम होती संख्या को लेकर चिंता जताई और कहा, देवभाषा की यह स्थिति देखकर मन में पीड़ा होती है। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए आचार्यगण ईमानदार प्रयास करें।

कहा, गुरुओं के नाम पर ही सनातन की पहचान है। सभी धर्म में मतभेद हो सकता हैं, लेकिन गुरु को सभी ने स्वीकार किया है। कहा, गुरुकुल परंपरा ने भारत को पूरे विश्व में स्थान दिलाया है। वर्तमान हालातों में संस्कृत विकास में गुरुकुल की परंपरा में काम करने की भी बात कही, जिससे आने वाली पीढ़ी संस्कृत के महत्व को समझ सके। कहा, इस काम में देश के गुरुकुल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कहा, योग गुरु बाबा रामदेव वेद और योग को सरलता से जनमानस तक पहुंचाने का काम रहे हैं, इसके लिए वह साधुवाद के पात्र हैं। कहा, आक्रांताओं के प्रभाव के कारण योग का प्रभाव कम हो गया था उसे बाबा रामदेव आधुनिक रूप में आम जनमानस तक पहुंचा रहे हैं। नई शिक्षा नीति पर रक्षा मंत्री ने कहा, कई राज्यों ने नई शिक्षा नीति के तहत अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें अचानक परिवर्तन संभव नहीं है।

कहा, मैकाले की शिक्षा पद्धति ने देश को राजनीतिक और मानसिक रूप से गुलाम बनाया था। स्वामी दर्शनानंद ने गुरुकुल की स्थापना कर इस दिशा में प्रकाश फैलाया, जो आज भी युवाओं को प्रकाशित कर रहा है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी सहित कई बड़े साधु-संत भी मौजूद थे।

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