सोमवार को तृतीय केदार श्रीतुंगनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ नई छतरी भी स्थापित की गई
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। सोमवार को संसार के सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव के तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर में नई छतरी और कलश स्थापना का कार्य बर्फबारी के बीच पूरे विधि-विधान से पुरोहितों ने संपन्न कराया।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय के प्रयासों से जीर्णशीर्ण हो चुकी तुंगनाथ मंदिर की छतरी का दानदाता की मदद से मरम्मत कार्य संपन्न हुआ। अजेंद्र अजय के मुताबिक, मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए कार्य चल रहा है। बताया, श्रीओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में कोठा भवन का जीर्णोद्धार कार्य तेजी से किया जा रहा है। साथ ही विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी की छतरी का भी जीर्णोद्धार कार्य प्रस्तावित है।
बताया, श्रीत्रिजुगीनारायण मंदिर के प्रचार प्रसार के लिए भी कार्य हो रहा है। ज्ञात हो कि तुंगनाथ मंदिर की नई छतरी का निर्माण देवदार की लकड़ी से हुआ है और छतरी को पहले की तरह नक्काशीदार बनाया गया है। उनके मुताबिक, पिछले माह चार सितंबर को पुरानी छतरी को उतारा गया था और कलश को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया था।
पांच सप्ताह बाद रविवार को प्रथम शारदीय नवरात्र को छतरी बनकर तैयार हुई और सोमवार को मंदिर के शीर्ष पर स्थापित की गई। बताया, छतरी की स्थापना के बाद तुंगनाथ में बारिश के बाद बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बताया, इसी दौरान कलश पूजा के बाद गर्भगृह से लाकर पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के शीर्ष में छतरी एवं कलश को पहले की तरह विराजमान कर दिया.

समिति अध्यक्ष के मुताबिक, छतरी का जीर्णोद्धार करने वाले दिल्ली के दानदाता संजीव सिंघल के सहयोग से 13.65 लाख रुपये से नई छतरी का निर्माण किया गया। बताया, कलश और छतरी की स्थापना के दौरान भगवान महादेव, भैरवनाथ, भूतनाथ और मां भगवती कालिका अवतरित हुईं तथा छतरी तथा कलश को स्थापित करने की अनुमति दी।

इस मौके पर मंदिर के सहायक अभियंता विपिन तिवारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, मठापति रामप्रसाद मैठाणी, मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, प्रबंधक बलबीर नेगी, भूतनाथ के पश्वा राजेंद्र भंडारी, मंगोली गांव के धर्म्वाण बंधु, मंदिर के पुजारी गीताराम मैठाणी, प्रकाश मैठाणी आदि मौजूद रहे।
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