May 6, 2026

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राजस्थान के राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल का माहौल, सुविधाओं को मंत्री ने देखा

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प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने शिक्षा व्यवस्था के साथ ही उपलब्ध संसाधनों का भी किया अवलोकन

कैबिनेट मंत्री ने राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर की भी परखी चिकित्सा व्यवस्थाएं, समझा तरीका

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राजस्थान भ्रमण के दौरान धौलपुर में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल एवं राजकीय मेडिकल कॉलेज का भ्रमण कर शैक्षिक माहौल एवं उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया।

राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के दौरे के दौरान मंत्री ने स्कूल प्रशासन और सैन्य अफसरों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 सहित अन्य विषयों पर चर्चा की। इसके अलावा धौलपुर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जानकारी ली। डॉ. रावत ने दोनों संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर शैक्षणिक गतिविधियों पर चर्चा की।

कैबिनेट मंत्री ने मीडिया को जारी बयान में बताया, उन्होंने धौलपुर में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल का दौरा कर शैक्षणिक एवं सैन्य प्रशिक्षण से संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की। स्कूल प्रबंधन व सैन्य अफसरों से मिलिट्री स्कूल के संचालन के बारे में जानकारियां प्राप्त की। मंत्री ने बताया, मिलिट्री स्कूल भ्रमण के दौरान उन्होंने सैन्य अधिकारियों के साथ शिक्षा से जुड़े तमाम विषयों एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

उन्होंने सैन्य अफसरों को उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। बताया, राज्य में एनईपी-2020 लागू कर दी गई है। साथ ही प्रदेश में वि़द्या समीक्षा केंद्र की स्थापना कर नवाचार, रोजगार और गुणवत्तापरक एजुकेशन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

कैबिनेट मंत्री ने धौलपुर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज का भ्रमण कर मुहैया चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी हासिल की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के कई विभागों का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं से बातचीत की। बताया, सरकार द्वारा मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

बताया, उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां मेडिकल छात्र हिप्पोक्रेटिक ओथ की जगह चरक शपथ लेते हैं। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे हिंदी भाषी छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करने में आसानी होगी।

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