December 14, 2025

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आजाद भारत का पहला समान नागरिक संहिता बिल पास

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उत्तराखंड राज्य की विधानसभा ने दो दिन तक चली करीब 10 घंटे की बहस के बाद ऐतिहासिक विधेयक पर ध्वनिमत से लगाई मुहर

कांग्रेस के बिल को प्रवर समिति को सौंपने की मांग को भी सदन ने ध्वनिमत से किया अस्वीकार, सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। 7/2/2024, ये कोई तारीख, महीना और साल ही नहीं, बल्कि यह दिन और तारीख पूरे देश को एक नई दिशा दिखाने वाला देवभूमि उत्तराखंड से मजबूती से उठा सशक्त कदम है, जो आने वाले समय में पूरे देश में सभी वर्ग, धर्म और समुदाय के नागरिकों के लिए आशा की नई किरण बनेगा।

हां, इस दिन, इस माह और इस तारीख को उत्तराखंड विधानसभा ने जो इतिहास रचते हुए दो दिन तक करीब दस घंटे तक सदन में चली बहस के बाद प्रदेश के समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड-2024 विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया, वह इतिहास में दर्ज हो गया। इससे पूर्व सदन के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हम आजादी के अमृतकाल में हैं और हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम एक समरस समाज का निर्माण करें, जहां पर संवैधानिक प्रावधान, सभी के लिए समान हों।

कहा, जब हम समान मन की बात करते हैं तो उसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम सभी के कार्यों में एकरूपता हो, बल्कि इसका अर्थ यह है कि हम सभी समान विचार और व्यवहार द्वारा विधि सम्मत् कार्य करें। सरकार गठन के तुरंत बाद पहली कैबिनेट की बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। सामान नागरिक संहिता पर हमने जो संकल्प लिया था, आज इस सदन में उस संकल्प की सिद्धि होने जा रही है।

कहा, समान नागरिक संहिता, विवाह, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार, विवाह विच्छेद जैसे मामलों में भेदभाव न करते हुए सभी को बराबरी का अधिकार देगा। यही प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार भी है। कहा, आजादी से पहले हमारे देश में जो शासन व्यवस्था थी, उसकी सिर्फ एक ही नीति थी और वो नीति थी फूट डालो और राज करो। अपनी उसी नीति को अपनाकर उन्होंने कभी भी सबके लिए समान कानून का निर्माण नहीं होने दिया।

कहा, उत्तराखंड की विधायिका एक इतिहास रचने जा रही है। आज इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए, न केवल इस सदन को, बल्कि उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को गर्व की अनुभूति हो रही है। कहा, हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत और श्रेष्ठ भारत मंत्र को साकार करने के लिए उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लाने का वादा किया था। सरकार गठन के तुरंत बाद पहली कैबिनेट की बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया ।

कहा, 27 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई। देश के सीमांत गांव माणा से शुरू हुई जनसंवाद यात्रा करीब नौ माह बाद 43 जनसंवाद कार्यक्रम करके नई दिल्ली में पूर्ण हुई। दो लाख 32 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। कहा, जिस प्रकार से इस देवभूमि से निकलने वाली मां गंगा अपने किनारे बसे सभी प्राणियों को बिना भेदभाव के अभिसिंचित करती है। इस सदन से निकलने वाली समान अधिकारों की ये गंगा सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करेगी।

कहा, हमारी सरकार का यह कदम संविधान में लिखित नीति और सिद्धांत के अनुरूप है। यह महिला सुरक्षा तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय है। कहा, समान नागरिक संहिता का विधेयक प्रधानमंत्री द्वारा देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में हमारे प्रदेश द्वारा अर्पित की गई एक आहुति मात्र है।

संहिता की कुछ खास बातें

विवाह केवल एक पुरुष व एक महिला के मध्य ही हो सकता है।

विवाह की आयु युवकों के लिए 21 वर्ष और युवतियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित किया गया है।

दंपती में से यदि कोई भी बिना दूसरे की सहमति से धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से विवाह विच्छेद करने और गुजारा भत्ता लेने का अधिकार।

विवाह और विवाह विच्छेद दोनों का पंजीकरण। यह पंजीकरण एक वेब पोर्टल के माध्यम से भी किया जा सकेगा।

सरकारी सुविधाओं का लाभ केवल वही दंपती ले पाएंगे, जिन्होंने विवाह का पंजीकरण कराया हो।

पहला विवाह छिपाकर किसी महिला को धोखा देकर दूसरा विवाह करने पर भी शिकंजा।

दंपती के विवाह विच्छेद या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की अभिरक्षा (कस्टडी) उसकी माता के पास ही रहेगी।

संपत्ति में अधिकार के लिए जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं, अब सभी को संपत्ति के अधिकार में समानता।

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