मंगलवार रात से बुधवार तक हो रही लगातार ड्रिलिंग के परिणाम आ रहे हैं सुखद
बुधवार रात या बृहस्पतिवार सुबह की किरण देख सकते हैं सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूर
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में 11 दिन से फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के प्रयास अब बस कुछ ही कदम दूर हैं। मंगलवार रातभर चली ड्रिलिंग और बुधवार को दिन से अभी रात तक हो रही ड्रिलिंग कभी भी आरपार होकर मजदूरों को नई रोशनी की किरण दिखा सकती है।
आगर मशीन से 800 एमएम के छह पाइप जहां डाले जा चुके हैं, वहीं 39 मीटर तक ड्रिलिंग होने के बाद से सातवें पाइप की बेल्डिंग होने के बाद ड्रिलिंग का काम शुरू हो गया है। रेस्क्यू आपरेशन के लिए बुधवार की रात से बृहस्पतिवार की सुबह काफी अहम साबित होने वाला है। बताया जाता है कि अब मजदूरों के करीब पहुंचने के लिए बस 15-20 मीटर की दूरी ही शेष बची है। सब कुछ ठीक रहा तो बुधवार रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने की उम्मीद भी जग गई है।
उधर, भारत सरकार के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने कहा, अगले 15 घंटे में मैं अंदर फंसे लोगों से रूबरू होना चाहता हूं। कहा, सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूर बृहस्पतिवार सुबह का सूरज देख सकते हैं।
कुछ मजदूरों के पेट में दर्द, दवाएं पहुंचाई गईं
उत्तराखंड सरकार के सचिव और रेस्क्यू अभियान के नोडल डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया, बुधवार को सुरंग के अंदर फंसे कुछ मजदूरों को पेट में दर्द की शिकायत थी, जिसके लिए दवाई भेजी गई हैं। इसके अलावा मजदूरों से बात करने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने ऑडियो कम्युनिकेशन शुरू किया है। इसके लिए भीतर माइक्रोफोन और स्पीकर भेज दिए गए हैं। मजदूरों को कुछ जरूरी कपड़े, ब्रश, टूथपेस्ट भेजे गए हैं।
उम्मीद के साथ ही उपचार की भी तैयारियां जोरों पर
सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के पास तक जैसे-जैसे रेस्क्यू टीम पहुंच रही है, वैसे वैसे ही 11 दिन से फंसे मजदूरों के प्राथमिक उपचार की भी तैयारियां तेज हो गई हैं। सिलक्यारा में ही एक आठ बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया गया है। इसके अलावा यहां से चार किमी दूर हेलीपैड बनाया गया है, जहां से एयरलिफ्ट कर सभी मजदूरों को एम्स ले जाया जा सकता है। जिला अस्पताल में भी 45 बेड अलग से रिजर्व कर दिए गए हैं।
आज सुबह पूरा हो सकता है रेस्क्यू अभियान
एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने कहा, जिस प्रकार से ड्रिलिंग मशीन अपनी पूरी क्षमता से चल रही है, उससे उम्मीद है कि बुधवार रात या बृहस्पतिवार सुबह तक बचाव अभियान पूरा हो सकता है। उधर, सूत्रों का कहना है कि सभी मजदूरों को बाहर निकालकर सीधे चिन्यालीसौड़ ले जाने की तैयारी। यहां पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मजदूरों से मिलेंगे।





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