मुख्यमंत्री ने ग्राफिक एरा विवि में चार दिवसीय 6वें आपदा प्रबंधन वैश्विक सम्मेलन का किया शुभारंभ
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। उत्तरखंड में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने के लिए भूमि की व्यवस्था के साथ ही केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा।
उपरोक्त बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को क्लेमेंटटाउन स्थित ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में 6वें आपदा प्रबंधन वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कही। सम्मेलन एक दिसंबर तक चलेगा। सम्मेलन में कई देशों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। धामी ने इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी के अनुभव पर आधारित पुस्तक रेजिलिएंट इंडिया का भी विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और समुदायों पर ध्यान केंद्रित कर जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रतिरोध की चुनौतियों पर चर्चा करना एवं समाधान करना है। कहा, उत्तराखंड प्राचीनकाल से ही शोध, साधना, अध्यात्म, ज्ञान और विज्ञान की उद्गम स्थली रहा है। आदि गुरु शंकराचार्य, गुरु नानकदेव, स्वामी विवेकानंद से लेकर रविंद्र नाथ टैगोर तक कई युग दृष्टाओं की आध्यात्मिक यात्रा में उत्तराखंड के दर्शन अवश्य होते हैं।
कहा, प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों का सामना सभी हिमालयी राज्यों को करना पड़ता है। इस बाबत वैश्विक स्तर पर हो रहे अध्ययनों, शोधों एवं अनुभवों को साझा करना भी समय की जरूरत है।प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को बेहतर रणनीतियों से कम किया जा सकता है। कहा, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में चिकित्सा सुविधाओं, सशक्त संचार व्यवस्था, ऑल वेदररोड, हैलीपोर्ट्स के निर्माण, शहरी नियोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हम आपदाओं का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कहा, इस सम्मेलन में विश्वभर के प्रतिष्ठित संस्थानों के विषय विशेषज्ञ, जलवायु परिर्वतन एवं आपदा से संबंधित ज्वलंत चुनौतियों और उनके समाधानों पर जो विचार मंथन करेंगे, आने वाले समय में आपदा प्रबंधन के लिए मददगार साबित होंगे। कहा, 8-9 दिसंबर को देहरादून में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 का आयोजन किया जा रहा, जिसमें देश-विदेश के औद्योगिक समूहों, निवेशकों द्वारा राज्य में निवेश को गति देने के लिए हिस्सा लेंगे।
इस मौके पर अंडमान निकोबार द्वीप के उप राज्यपाल एडमिरल डीके जोशी, मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, कार्यकारी निदेशक एनआईडीएम राजेंद्र रत्नू, सचिव आपदा प्रबंधन डा. रंजीत कुमार सिन्हा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत आदि मौजूद थे।
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