May 24, 2026

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शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद

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गढ़वाल स्काउट बैंड की धुनों के बीच भगवान बदरीविशाल के कपाट विधि विधान से हुए बंद

बदरीनाथ मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया, साढे़ पांच हजार तीर्थयात्री रहे मौजूद

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। गढ़वाल स्काउट बैंड की धुनों के बीच शनिवार को भगवान बदरीविशाल के कपाट पूरे विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने से पहले मंदिर को गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय भी मौजूद थे। मंदिर के कपाट दोपहर बाद 3.33 बजे पूजा के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी श्रवण नक्षत्र में शीतकाल के लिए बंद हो गए। कुछ दिन पहले हुई बर्फबारी के बाद कपाट बंद होने के दौरान शनिवार को मौसम साफ रहा। कपाट बंद होने पर मंदिर को फूलों से सजाया गया था। जय बदरीविशाल के उदघोष गूंज रहे थे।

कपाट बंद होने के समय साढ़े पांच हजार से अधिक श्रद्धालु साक्षी बने। कपाट बंद के बाद बदरीनाथ धाम से रविवार 19 नवंबर को सुबह उद्धव, कुबेर की देव डोली पांडुकेश्वर और आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर जोशीमठ प्रस्थान करेगी। कपाट बंद होने परमंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा, इस बार सबसे अधिक अड़तीस लाख रिकार्ड तीर्थयात्री बदरी-केदार पहुंचे हैं।

मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिह ने बताया, कपाट खुलने की तिथि से 17 नवंबर शुक्रवार देर रात तक 18 लाख 36 हजार 519 तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे, जो पिछले सभी यात्रा वर्षों में सबसे अधिक है। बताया, कपाट बंद होने के पूर्व सुबह महाभिषेक के बाद बालभोग लगाया गया, फिर दिन में 11 बजे राजभोग लगा। दोपहर पौने एक बजे सायंकालीन पूजा शुरू हुई।

पौने दो बजे रावल ने स्त्री रूप धारण कर लक्ष्मी को बदरीनाथ मंदिर गर्भ गृह में विराजमान किया। इससे पहले उद्धव एवं कुबेर जी मंदिर प्रांगण में विराजमान हुए। सवा दो बजे सायंकालीन भोग और शयन आरती संपन्न हुई। ढाई बजे से साढ़े तीन बजे तक रावल द्वारा कपाट बंद की रस्म पूरी करते हुए भगवान बदरीविशाल को हाथ से बुना गया ऊंन का घृत कंबल उढ़ाया।

बताया, दोपहर बाद 3.33 बजे बदरीनाथ मंदिर गर्भगृह और मुख्य सिंह द्वार के कपाट रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी द्वारा शीतकाल हेतु बंद कर दिए गए। इसी के साथ ही कुबेरजी रात्रि प्रवास हेतु बामणी गांव चले गए। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया, बदरीनाथ धाम रावल के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी ने नृसिंह मंदिर जोशीमठ के लिए प्रस्थान किया। 19 नवंबर को आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी एवं रावल योग बदरी पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे।

इस मौके पर मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पंवार, मंदिर समिति सदस्य वीरेंद्र असवाल, भास्कर डिमरी, आशुतोष डिमरी, सुभाष डिमरी, प्रकाश कपरवाण, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, एसडीएम कुमकुम जोशी, प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी, ईओ नगर पंचायत सुनील पुरोहित, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ आदि मौजूद रहे।

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