सोमवार दोपहर तक 36 मीटर तक हुई वर्टिकल ड्रिलिंग, ड्रिलिंग की रफ्तार तेज, उम्मीद की किरण दिखी
सुरंग के अंदर फंसे ऑगर मशीन के बरमे को बाहर निकाला गया, मैन्युअल ड्रिलिंग का काम भी शुरू
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के काम में रविवार से चार योजनाओं पर शुरू काम ने जहां गति पकड़ ली है, वहीं सोमवार को और भी तेजी आई है। रविवार शाम से शुरू हुई वर्टिकल ड्रिलिंग सोमवार दोपहर तीन बजे तक 36 मीटर तक हो चुकी थी।
उधर, सुरंग के अंदर फंसे ऑगर मशीन के ऑगर (बरमे) को भी सोमवार दोपहर बाद तक बाहर निकाल लिया गया है। इसके साथ ही अब यहां पर मैन्युअल ड्रिलिंग का काम भी सेना की देखरेख में शुरू भी कर दिया गया है। इस काम को भारतीय सेना की इंजीनियरिंग बटालियन मद्रास सेपर्स की निगरानी में आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां मैन्युअल ड्रिलिंग के लिए रैट माइनिंग विधि अपनी जाएगी, जिसमें छोटी-छोटी सुरंगे खोदी जाती हैं। गौरतलब हो कि कोयले की खदान में इस तरह की सुरंगें बनाई जाती हैं।
इसके अलावा सुरंग के अंदर मैन्युअल खोदाई के लिए कुछ विशेषज्ञ श्रमिकों को दूसरे राज्यों से भी बुलाया गया है। रैट माइनिंग में एक्सपर्ट ये श्रमिक मैन्युअल ड्रिलिंग को अंजाम देंगे।
मानसिक स्थिति जानने के लिए रेस्क्यू रोबोटिक सिस्टम
उधर, सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की मानसिक स्थिति जानने के लिए रेस्क्यू रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। राहत एवं बचाओ कार्य के प्रभारी कर्नल दीपक पाटिल ने लखनऊ से रोबोटिक्स साइंटिस्ट मिलिंद राज को बुलाया था, वो सोमवार को सिलक्यारा पहुंच भी गए हैं।
आस्था का भी सहारा, सुरंग के मुहाने पर हवन और पूजा पाठ
इन सबके अलावा आस्था का भी सहारा मजदूरों को बाहर निकालने के लिए भी लिया जा रहा है। सोमवार को सिलक्यारा सुरंग के मुहाने के पास स्थानीय ग्रामीणों द्वारा हवन और पूजा अर्चना की गई। ग्रामीणों ने हवन और पूजा के माध्यम से सुरंग के अंदर फंसे सभी मजदूरों की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना की।





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