सिलक्यारा सुरंग के ऊपर से अब ड्रिलिंग करने के लिए रास्ता बनाने का काम मशीनों ने शुरू भी कर दिया है
अमेरिकन ऑगर मशीन के पांचवें पाइप के डालने के दौरान दगा देने के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने चेंज किया प्लान
रविवार को सुरंग मामले का मुआयना और केंद्रीय एजेंसियों की बैठक लेकर जरूरी निर्देश देंगे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
बेबाक दुनिया ब्यूरो
देहरादून। सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए अब केंद्र और राज्य सरकार ने पांच प्लान पर एक साथ काम शुरू करते हुए दोनों सरकारों की छह एजेंसियां साथ में काम करेंगी। इसकी शुरुआत भी शनिवार को दोपहर बाद से शुरू भी कर दिया गया है।
उधर, रविवार 19 नवंबर के केंद्रीय सड़क और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी सिलक्यारा सुरंग हादसे का मौका मुआयना करने पहुंच रहे हैं। उनके साथ उनके विभाग के सीनियर अफसरों के अलावा विशेषज्ञों के भी आने की संभावना है। उधर, सिलक्यारा सुरंग के ऊपर से अब ड्रिलिंग के लिए रास्ता बनाने का काम जेसीबी से शुरू भी कर दिया गया है।
पांच प्लान में सुरंग के सिलक्यारा छोर, बड़कोट छोर और सुरंग के ऊपर और दाएं और बाएं से ड्रिलिंग कर रास्ता तैयार किया जाएगा, जिससे अंदर फंसे सभी 41 मजदूरों को बचाया जा सके। टनल हादसे के बाद शनिवार को केंद्र सरकार के सलाहकार भाष्कर खुल्बे और प्रधानमंत्री कार्यालय के उपसचिव मंगेश घिल्डियाल ने मौका मुआयना कर उक्त जानकारी दी। दोनों ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद रेस्क्यू अभियान की रणनीति को लेकर हुई विशेष बैठक में विचार-विमर्श के बाद घोषणा की।
इसके साथ ही रेस्क्यू अभियान के सभी मोर्चों पर युद्धस्तर पर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए सुरंग के दाएं और बाएं हिस्से से इस्केप टनल बनाने के साथ सुरंग की ऊपरी पहाड़ी से वर्टिकल ड्रिलिंग करने और सुरंग के पोलगांव वाले हिस्से की तरफ से भी टनल बनाने के विकल्प पर अमल भी शुरू हो गया है।
भास्कर खुल्बे ने शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे हेलीकॉप्टर से एनएचआईडीसीएल के अफसरों और विशेषज्ञों की टीम के साथ सिलक्यारा पहुंचे और टनल के भीतर जाकर जायजा लेने के बाद रेस्क्यू अभियान के लिए केंद्र सरकार द्वारा तैनात संगठनों के पदाधिकारियों के साथ ही टनल के निर्माणकर्ता एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों से जानकारी ली।
पीएमओ के उपसचिव मंगेश घिल्डियाल व भास्कर खुल्बे ने सुरंग की ऊपरी पहाड़ी के शीर्ष पर जाकर इस्केप पैसेज बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा चिन्हित स्थलों का निरीक्षण किया और सुरंग परियोजना व रेस्क्यू अभियान से जुड़े अफसरों व विशेषज्ञों की बैठक लेकर रेस्क्यू अभियान के कई विकल्पों पर विचार किया। बैठक में लिए गए निर्णयों पर अमल शुरू करते हुए प्लेटफॉर्म बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
जरूरी मशीनरी मौके पर पहुंचाने के लिए दो विकल्पों पर विचार
देश के कई हिस्सों से जरूरी मशीनरी, सामग्री व संसाधनों को सिलक्यारा पहुंचाने के लिए एअरलिफ्ट करने या कॉरिडोर बनाकर सड़क मार्ग के जरिए पहुंचाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लेकर देशभर के संगठनों व एजेंसियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहकर समन्वय और सहयोग करने की अपेक्षा की गई। बैठक में राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के द्वारा दिए गए सहयोग को सराहनीय बताते हुए रेस्क्यू अभियान के अगले दौर में भी इसी तरह का सहयोग व समन्वय कायम रखने की जरूरत बताई गई।
सभी को जल्द सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा : घिल्डियाल
पीएमओ के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल ने सुरंग में फंसे मजदूरों की जीवनरेखा बनी पाइप लाइन से अंदर फंसे मजदूरों तक पोषक फूड सप्लीमेंट, ओआरएस आदि दवाएं भी भिजवाईं और श्रमिकों के परिजनों व सहयोगी श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि सभी को जल्द सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा। इस मौके पर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी, सुरंग से मजदूरों को निकालने के रेस्क्यू अभियान के लीडर कर्नल दीपक पाटिल, एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खलको, अधिशासी निदेशक संदीप सुधेरा, उत्तरकाशी के सीडीओ गौरव कुमार, सीओ प्रशांत कुमार, अनुज कुमार, सुरेंद्र भंडारी, भूवैज्ञानिक जीडी प्रसाद सहित केंद्र व राज्य सरकार के कई संगठनों के अधिकारी मौजूद रहे।
संचार सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश
सिलक्यारा में संचार सुविधाओं को सशक्त करने के लिए कई टेलीकॉम एजेंसिंयों को निर्देशित किया गया है। जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला ने केंद्रीय संचार मंत्रालय के अफसरों से वार्ता भी की है। इसके बाद मौके पर टेलीकॉम एजेंसियों ने टावर और अन्य उपकरणों की स्थापना का काम शुरू कर दिया है। डीएम ने रेस्क्यू अभियान में केंद्र सरकार के संगठनों को सहयोग करने एवं समन्वय स्थापित करने के लिए जिले से अतिरिक्त मानव संसाधन भी मुहैया करने हेतु आदेश जारी करते हुए चौबीसों घंटे अधिकारियों की तैनाती की है। जिला प्रशासन ने सुरंग में फंसे मजदूरों और उनके परिजनों के मनोबल को बनाए रखने के लिए मनोचिकित्सकों की तैनाती भी की है।




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