May 8, 2026

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घर-घर विराजेंगे गणेश, 81 परिवारों ने सीखा प्राण प्रतिष्ठा विधान

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कार्यशाला में वैदिक और सनातनी मूल्यों की संरक्षा के लिए सक्रिय धर्म सेवा का व्रत लिया गया

बेबाक दुनिया ब्यूरो

देहरादून। भगवान शंकर आश्रम मसूरी में सोमवार को पद्मा एकादशी को गणपति महोत्सव की समय अवधि में कैसे प्रतिमा को जीवित कर लाभान्वित हो, इसके दिव्य अभियान का शुभारंभ किया गया।

81 परिवारों के सैकड़ों भक्तों ने प्राण प्रतिष्ठा की विधि सीखी। आज की कार्यशाला के माध्यम से सभी वैदिक और सनातनी मूल्यों की संरक्षा के लिए सक्रिय धर्म सेवा का व्रत लिया गया। आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन की अधिशासी प्रवक्ता मां यामिनीश्री ने बताया, कार्यशाला आज से पहले किसी आचार्य ने नहीं की और सर्वप्रथम यह शक्ति संधान पीठ के मुख्य अधिष्ठाता जगतगुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम महाराज द्वारा किया गया है।

बताया, ट्रस्ट के प्रमुख आर्यम जी महाराज के सानिध्य और निर्देश में यह कार्यशाला गणेश महापर्व के शुभ दिवसों में संपन्न हुई। बताया, कार्यशाला का उद्देश्य भारत और विश्व भर में विस्तारित भारतीय वैदिक और सनातनी मूल्यों की सारगर्भित पुनर्प्रतिष्ठा करना है। बताया, आर्यम महाराज ने 81 शिष्यों को कैसे एक प्रतिमा को जागृत करें, यह बताकर शिष्यों के जीवन में नई रोशनी दिखाई है।

बताया, कार्यशाला में श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा जिसमें गणपति को मुख्य रखा है, सिखाया गया। हर प्रतिभागी को भगवान श्री गणपतिजी की ओनेक्स, जेड अथवा शुद्ध स्फटिक प्रतिमा, चांदी का श्रीगणेश यंत्र, रूह इलायची, खस, गणेश का आसन, पुस्तक गणपति सूत्र दिया गया।महाराज ने बताया कि अक्सर लोगों को किसी भी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी आती है, जिससे उन्हें लाभ नहीं मिलता है।

कार्यशाला में प्राण प्रतिष्ठा की विधि बता कर कैसे प्रतिमा को जागृत कर सकते हैं उसका रहस्य क्या है, देशभर से ही नहीं विदेश से भी भक्तों ने इस दिव्य कार्यशाला में भाग लेकर स्वयं प्रतिष्ठा करना सीखा। महाराज ने स्पष्ट किया, वह हर व्यक्ति को स्वयं हर कार्य आना चाहिए, फिर वो धार्मिक ही क्यों न हो।

कहा, अक्सर लोग ज्ञान न होने से ऐसे ही पूजा प्रार्थना करते रहते हैं। कहा, बिना जीवित प्रतिमा के भगवान श्रीजी तक प्रार्थना पहुंचने में समय लगता है, जिससे विश्वास कम होता है, लेकिन जिन शिष्यों का जीवन आर्यम महाराज के सानिध्य एवं दिशा निर्देशानुसार है, उनके जीवन में आमूल चूल परिवर्तन हो रहा है। अब सभी लोग अपने मूल के विशिष्ट धर्म आधारों को समझने और सीखने के प्रति लालायित हैं।

बताया, आश्रम द्वारा शुरू की गईं कई योजनाओं में यह भी विशिष्ट अभियान है। इसे भविष्य में पूरे भारत और विश्व के कई देशों में प्रसारित और प्रभावित कराने का प्रकल्प है। साथ में ही आर्यम महाराज के दिशा निर्देश में एक पब्लिकेशन के प्रकाशक निमित जैन ऋतुराज द्वारा गणपति सूत्रं नाम की पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक में गणपति के अचूक लाभ प्राप्ति के पाठ एवं मंत्र उपलब्ध करवाए हैं।

कहा, पिछले 20 वर्षों में विभिन्न अनुष्ठानों और पुष्पार्चनों के बाद यह अनुभव किया कि शुद्ध रूपेण एवं वांछित मंत्र पाठ ठीक से उपलब्ध नहीं हैं। इस मौक पर हर्षिता आर्यम, करण पम्मीराज, उत्कर्ष सिंह, सुनील आर्य, देवेंद्र, अश्वनी कुमार, प्रतिभा आर्य, मुकेश पटेल, निमित जैन, अंकिता जैन, रवि सिंह , किशोर कुमार आदि थे।

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