लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने सुनाया फैसला, कानपुर के शिक्षक के हाथ में कलावा बंधा देख की थी हत्या
बेबाक दुनिया ब्यूरो
लखनऊ। कानपुर के शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में कलावा बंधा देखकर आईएस के दो आतंकियों ने करीब सात साल पहले उनकी हत्या कर दी थी।
बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) लखनऊ की विशेष अदालत के जज दिनेश कुमार मिश्रा ने आईएस के दो आतंकियों आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को फांसी की सजा मुकर्रर की। अदालत ने दोनों पर 11.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम मृत शिक्षक के आश्रितों को प्रदान की जाएगी।
दोनों दोषी आतंकवादी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से कोर्ट में पेश हुए। दोनों को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद ही दोनों को फांसी दी जाएगी। अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का मामला बताते हुए दोनों आतंकियों को फांसी की सजा दी।
कोर्ट का कहना था कि इस मामले को सामान हत्या नहीं माना जा सकता और जिहाद के नाम पर दूसरे धर्म के लोगों की जान लेकर देश की अखंडता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को चोट पहुंचाना दुर्लभ मामला है। कोर्ट ने कहा, धर्म की पहचान कर हत्या की साजिश रचने और उसको अंजाम देना बेहद खतरनाक है।
गौरतलब हो कि रिटायर्ड शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के बेटे अक्षय शुक्ला ने 24 अक्टूबर 2016 को कानपुर के चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उनके पिता रमेशबाबू शुक्ला उर्फ स्वामी आत्मप्रकाश ब्रह्मचारी स्कूल से घर लौट रहे थे, तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
यह भी गौरतलब हो कि उपरोक्त दोनों आतंकवादी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को 28 फरवरी 2023 को एनआईए की कोर्ट ने एक अन्य मामले में भी फांसी की सजा सुनाई थी। यह भी गौरतलब ही कि यह दोनों आतंकवादी भोपाल-उज्जैन यात्री ट्रेन धमाका मामले में भी आरोपी हैं और यह मामला भोपाल की अदालत में चल रहा है।
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