February 15, 2026

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सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 रवाना

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चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लांचिंग के बाद इसरो के खाते में एक और सफलता दर्ज

आदित्य एल-1 की सफल लांचिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने दी बधाई

बेबाक दुनिया डेस्क

नई दिल्ली। आखिरकार दो सितंबर की तारीख भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के खाते में एक और सफलतापूर्वक दर्ज हो गई, जब आदित्य एल-1 सूर्य की खोज के लिए सफलता से लांच हो गया। इसरो की इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने दी बधाई है।

गौरतलब हो कि चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद अब देश के साथ पूरे विश्व की निगाहें इसरो के सूर्य मिशन आदित्य एल-1 पर टिकी थीं। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से शनिवार को सुबह 11.50 बजे आदित्य एल-1 को लॉन्च कर दिया गया। आदित्य एल-1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी और सूर्य के बीच की एक फीसदी दूरी तय करके एल-1 पॉइंट पर पहुंचा देगा। लॉन्चिंग 127 दिन बाद यह अपने पॉइंट एल-1 तक पहुंचेगा।

आदित्य एल-1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी और सूर्य के बीच की एक फीसदी दूरी तय करके एल-1 पॉइंट पर पहुंचा देगा और लॉन्चिंग के ठीक 127 दिन बाद यह अपने पॉइंट एल-1 तक पहुंचेगा। इसके बाद पॉइंट पर पहुंचने के बाद आदित्य एल-1 बेहद अहम डेटा भेजना शुरू कर देगा।
उधर, आदित्य एल-1 की सफलतापूर्वक लांचिंग पर इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने टीम को दी बधाई देते हुए कहा, अब से मिशन अपनी यात्रा शुरू करेगा, जो करीब 125 दिनों की लंबी यात्रा होगी।

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को बधाई देते हुए कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा जारी रखी है। आदित्य एल-1 के सफल प्रक्षेपण के लिए, इसरो के हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।

उधर, सफल लॉन्चिंग पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, यह भारत के लिए सनशाइन मूमेंट है. हम सभी का भाग्य है कि हम श्रीहरिकोटा में बनने वाले एक सफल इतिहास का हिस्सा हैं। वहीं, आदित्य एल-1 धरती के चारों तरफ 16 दिनों तक पांच ऑर्बिट मैन्यूवर करके सीधे धरती की गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र यानी स्फेयर ऑफ इंफ्लूएंस से बाहर जाएगा।

आदित्य एल-1 का वजन 1480.7 किलोग्राम है। उधर, सफल लांचिंग के बाद श्रीहरिकोटा के व्यूवर्स गैलरी में मौजूद भीड़ ने भारत माता की जय के नारे लगाए। उधर, आदित्य एल-1 धरती से 15 लाख किमी दूर स्थित प्वाइंट से सूरज की स्टडी करेगा।

ये होता है पापा पैलोड

आदित्य एल-1 के साथ सूर्य के अध्ययन के लिए सात पैलोड्स भी शामिल हैं। इसमें पापा पैलोड चर्चा में है। पापा यानी प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर हैं।

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