करीब 16 साल बाद कवियित्री की हत्या के मामले के दोनों दोषियों की समय पूर्व हुई रिहाई
बेबाक दुनिया डेस्क
लखनऊ/गोरखपुर। सुप्रीम कोर्ट के रिहाई के आदेश पर रोक लगाने से इनकार के बाद कवियित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे यूपी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को 16 साल बाद शुक्रवार को गोरखपुर जेल से रिहा कर दिया गया।
गौरतलब हो कि नौ मई 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में मधुमिता शुक्ला की हत्या के मामले में उत्तराखंड की कोर्ट से उम्रकैद की सजा पाए अमरमणि और मधुमणि पहले उत्तराखंड की हरिद्वार जेल में थे।
चार दिसंबर 2008 को हरिद्वार जेल से पहले मधुमणि को गोरखपुर जेल स्थानांतरित किया गया। इसके बाद 13 मार्च 2012 को अमरमणि गोरखपुर जेल स्थानांतरित किए गए। दोनों दंपत्ति को 25-25 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जेल से रिहा किया गया।
कवियित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रिहाई का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए नोटिस जारी कर मामले को आठ सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई जस्टिस अनिरुद्ध बोस और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने की।
गौरतलब हो कि पिछले बृहस्पतिवार को यूपी के कारागार विभाग में 16 वर्ष की सजा काट चुके अमनमणि और उसकी पत्नी मधुमणि की समयपूर्व रिहाई का आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ ही कवियित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
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